Monday, 14 May 2012

मां बिन अधूरी....मेरी कहानी



गर्मी की धूप में वो मेरी छांव है,
जिंदगी के सफर की साथी अविराम है।
सर्दी की रातों में गर्माहट का एहसास है,
घर से हूं मीलों दूर फिर भी मां मेरे आसपास है।
मुश्किलों में बन जाती चट्टान है,
खुशियों में दिल का अनकहा अरमान है।


जिंदगी का पहला कदम मां के साथ बढ़ाया है,
अंधेरी गलियों में मां ने रास्ता दिखाया है।
कई बार गम के बादलों ने जब आकर मुझे घेरा है,
मेरी मां ने बनकर सूरज जिंदगी में कर दिया उजेरा है।
मेरे सपने पूरे करने की खातिर मां रात रात भर जागती है,
सारा दर्द छिपाकर दिल में हरदम ही मुस्काती है।
मैं सागर की हूं मछली वो मेरा दाना पानी है,
मां के साथ जुडा हर लम्हा वरना मेरी जिंदगी अधूरी कहानी है।

2 comments:

Anonymous said...

बढ़िया...
कलम चलती रहनी चाहिए...
तलवार की धार घिसने से और तेज़ होगी...

Unknown said...

Dhanywad chauhan ji..